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गुरू सनातन गोस्वामी  की स्मृति मे निकली मुडिया शोभायात्रा

Manish Kumar Sharma 2020-07-05 11:26:31    MEDITATION 5168




गुरू सनातन गोस्वामी  की स्मृति मे निकली मुडिया शोभायात्रा
गोवर्धन, 5 जुलाई 2020, (आरएनआई)। गिरिराज नगरी मै मुडिया संतो की शोभायात्रा तो धूमधाम से निकली मगर मेले की रौनक श्रद्धालुओ की भीड गायव थी।।

गोवर्धन मै गुरू शिष्य परंपरा का पर्व गुरू पूर्णिमा गुरू पूजन कर सांकेतिक  रूप मै मनाया।  पुलिस प्रशासन की भारी वंदिशो के बीच मुडिया संतो ने गुरू सनातन गोस्वामी की स्मृति मै मुडिया शोभायात्रा निकाली। कस्वा के चकलेश्वर स्थित श्री राधा श्याम सुन्दर मंदिर से महंत रामकृष्ण दास की अगुवाइ मै मुडिया शोभायात्रा का शुभारंभ सुवह 10:30 बजे हुआ। मंदिर मै सांकेतिक गुरू पूजन उपरांत शुरू हुयी शोभायात्रा मै सिर मुंडाये मुडिया संत ढोल , ढप , मृदंग , झांझ , मजीरो की सुर ताल पर हरिनाम संकीर्तन करते हुये गोवर्धन की सडको से निकले तो देखने के लिये इस वार केवल घरो के दरवाजो पर स्थानीय नागरिक ही खडे दिखे। 

मुडिया संत चकलेश्वर स्थित पूज्य सनातन गोस्वामी पाद की भजन कुटीर पर पहुचे तथा नमन किया। तदोपरांत हरदेव जी पर नमन करते हुये कस्वा मै मानसी गंगा परिक्रमा की । शोभायात्रा का कुछ स्थानो पर पुष्प वर्षा   कर स्वागत किया गया। दूसरी मुडिया शोभायात्रा चकलेश्वर स्थित महाप्रभु जी मंदिर से महंत गोपालदास की अगुवाई मे शाम 7:00 बजे निकाली गयी। 

इस अवसर मुडिया संतो के आलावा क्षेत्रीय विधायक ठा• कारिंदा सिंह  , भाजपा नेता सियाराम शर्मा , मा •चैतन्य कृष्ण शर्मा , गिर्राज प्रसाद शर्मा सहित सीमित संख्या मे मुडिया संत व स्थानीय लोग उपस्थित रहे। इस दौरान शोभायात्रा के साथ पुलिस बल की पर्याप्त सुरक्षात्मक पहरा रहा।




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कादीपुर, 5 जुलाई 2020, (आरएनआई)। कादीपुर के प्रसिद्ध अघोर पीठ बाबा सत्यनाथ मठ पर गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर मठ के पीठाधीश्वर अवधूत उग्र चंडेश्वर कापाली बाबा के निर्देशन में अघोराचार्य बाबा सत्यनाथ पादुका पूजन, श्रृंगार, आरती आदि कार्यक्रम पूरे विधि विधान से संपन्न हुआ।
गुरू सनातन गोस्वामी  की स्मृति मे निकली मुडिया शोभायात्रा
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कृषि विज्ञान के जनक ऋषि पाराशर
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दुनिया के अन्य महाद्वीपों के लोग जब वर्षा, बादलों की गड़गड़ाहट के होने पर भयभीत होकर गुफाओं में छुप जाते थे... जब उन्हें एग्रीकल्चर का ककहरा भी मालूम नहीं था.. उससे भी हजारों वर्ष पूर्व ऋषि पाराशर मौसम व कृषि विज्ञान पर आधारित भारतवर्ष के किसानों के मार्गदर्शन के लिए" कृषि पाराशर" नामक ग्रंथ की रचना कर चुके थे|
कोरोना महामारी की समाप्ति के लिए भुतही बलान की पूजा को जुट रहे है सैकड़ों महिलाएं
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फुलपरास (मधुबनी), 31 मई 2020, (आरएनआई)। वैश्विक महामारी कोरोना महामारी से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाए उपवास रखकर भुतही बलान नदी की पूजा अर्चना कर रही है। प्रसाद में दही-चूड़ा व फल लड्डू भी चढ़ा रहे है। जिससे एनएच किनारे स्थित भुतही बलान माता के मंदिर में दिनभर भीड़ लगी रहती है। जानकारी के अनुसार फुलपरास अनुमंडल क्षेत्र से गुजरने वाले भुतही बलान नदी में एनएच ‌57 बलान पुल के उत्तर वाहनी तट पर आसपास के दर्जनों गांव के महिलाओं के द्वारा कोरोना महामारी से बचाव को लेकर नदी में जाकर पूजा अर्चना किया जा रहा है। यह सिलसिला करीब पिछले दो सप्ताह से जारी है। और भूतही बलान नदी में पूजा के लिए विभिन्न गांव से प्रत्येक दिन सैकड़ों की संख्या में महिलाएं जुट रही है।चूड़ा-दही लड्डू,पान, सुपारी,अछत एवं गेरूआ, धुप दीप जलाकर केला पत्ता पर बलान नदी में कोरोना देवी का भोग लगाकर पूजा अर्चना की जा रही है। साथ ही भूतही बलान पुल के निकट स्थित बलान माता की मंदिर में भी महिलाओं के द्वारा जल फूल चढ़ाकर वैश्विक महामारी से बचने के लिए बलान माता की प्रार्थना कर रही है।, पूजा के लिए क्षेत्र के विभिन्न गांव के महिलाएं नदी के तट पर पहुंच रहे हैं। फुलपरास,नरहिया हनुमान नगर,धबही, ननपट्टी, रामनगर धौसही,मुरली,सिसबा बरही,नवटोल सहित आसपास के दर्जनों गांव के सैकड़ों महिला बलान नदी में आकर कोरोना देवी की पूजा अर्चना कर रही है।बलान नदी के तट पर पूजा कर रहे महिलाओं से पूछने पर उक्त महिलाओं ने बताया कि अपने परिवार बच्चें को कोरोना महामारी से बचने व सुरक्षित रहने को लेकर बलान नदी में दही-चूड़ा के प्रसाद चढ़ाकर पूजा अर्चना की जा रही है। और महिलाओं ने बताया कि भूतही बलान नदी में कोरोना देवी की पूजा की नाम से क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है। और प्रत्येक दिन सैकड़ों सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र के विभिन्न गांव से महिलाओं ने भूतही बलान नदी में आकर पूजा अर्चना कर रही है। इस महिलाओं का कहना है कि नदी के तट पर कोरोना देवी की पूजा अर्चना की जा रही है।(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)
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देहरादून, 15 मई 2020, (आरएनआई)। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट छह माह के शीतकालीन अवकाश के बाद शुक्रवार तड़के साढ़े चार बजे खोल दिए गए.
बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुले
Root News of India 2020-04-29 08:07:19
रुद्रप्रयाग, 29 अप्रैल 2020, (आरएनआई)। ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ भगवान के कपाट इस यात्रा वर्ष में मेष लग्न, पुनर्वसु नक्षत्र में आज प्रातः 06 बजकर 10 मिनट पर विधि-विधान पूर्वक खुल गये हैं।
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Root News of India 2020-04-29 07:45:01
देहरादून, 29 अप्रैल 2020, (आरएनआई)। उत्तराखंड में स्थित पवित्र पावनी मां गंगा और यमुना के उद्गम स्थलों के सामीप्य मंदिरों को वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य ग्रीष्मकालीन दर्शनों के लिये खोल दिया गया। गंगोत्री में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से की गई। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस 'कोविड-19' के कारण लागू राष्ट्रव्यापी पूर्णबन्दी के समस्त नियमों का अनुपालन करते हुए रविवार को गंगोत्री धाम के कपाट गंगा पूजन, गंगा सहस्त्रनाम पाठ एवं विशेष पूजा अर्चना के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ रोहिणी अमृत योग की शुभ बेला पर आज दोपहर 12:35 बजे खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के दौरान सामाजिक दूरी का पूर्ण रूप से पालन किया गया तथा सभी ने मास्क पहने हुये थे। उल्लेखनीय है कि 25 अप्रैल को माँ गंगा जी की डोली उनके मायके एवं शीतकालीन प्रवास मुखबा से भैरोंघाटी के लिए रवाना हुई थी। भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद मां गंगा की डोली आज प्रात: सात बजे गंगोत्री के लिए रवाना होकर लगभग साढ़े दस बजे गंगोत्री धाम पहुंची। इसके बाद परम्परागत स्थापना कार्यक्रम विधि विधान से आयोजित हुआ।
तमिलनाडु: मंदिरों में दिखने लगा लॉकडाउन का असर, बंदी से हुआ राजस्व में करोड़ों का नुकसान
Root News of India 2020-04-28 09:25:05
चेन्नई, 28 अप्रैल 2020, (आरएनआई)। देश में चल रहे लॉकडाउन ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है। इसका असर अब तमिलनाडु के मंदिरों पर भी देखने को मिल रहा है, उन्हें भी करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
12 ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं के आने पर रोक लगी तो भगवान खुद भक्तों तक पहुंच रहे, लोगों को खाना खिलाने से लेकर राहत कोष तक में योगदान
Root News of India 2020-04-19 11:15:36
नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2020, (आरएनआई)। देश के जिन 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में रोज भक्तों की भीड़ पहुंचकर भगवान को भोग लगाती थी, अब उन मंदिरों से उनके घर भोजन प्रसाद के रूप में पहुंच रहा है। सात ज्योतिर्लिंग मंदिर अपने क्षेत्र के जरूरतमंदों तक भोजन-अन्न पहुंचा रहे हैं। मंदिरों की ओर से सरकार को राहत कोष में दान भी दिया है। मंदिरों के पट केवल पूजन-आरती के लिए ही खोले जाते हैं। पुजारी भगवान की नियमित सेवा कर रहे हैं।
Easter being celebrated across the world today
Root News of India 2020-04-12 10:05:01
New Delhi, 12-4-2020, (RNI): Easter is being celebrated across the globe today. It signifies the resurrection of Jesus Christ after his crucifixion and death at Calvary on Good Friday. President, Vice President and Prime Minister have greeted people on Easter.
Good Friday - April 10, 2020
Root News of India 2020-04-10 07:30:14
New Delhi, 10-4-2020, (RNI): Good Friday commemorates the death of Jesus on Calvary, the site just outside the walls of Jerusalem, where Jesus was crucified. It falls on the Friday before Easter, for 2020, that’s April 10. Most Christian denominations recognize Good Friday as a holy day, with many, including members of Catholic, Eastern Orthodox and Lutheran faiths, fasting and attending church services. But there is so much more to this holiday than just these religious rituals. Good Friday is, for many, an intensely personal day of prayer and devotion. Let’s take a closer look.33 ADCrucifixionJesus hung on the cross between two thieves for six hours before dying. He would be resurrected the following Sunday, now known as Easter Sunday.
जहां द्रोपदी ने की थी भगवान शिव की आराधना
Rupesh Kumar 2020-03-19 10:09:56
अरेराज, 19 मार्च 2020, (आरएनआई )। बिहार के मोतिहारी शहर से 28 किमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित अरेराज में भगवान शिव का प्रसिद्व मंदिर है जो सोमेश्वर शिव मंदिर कहलाता है। बिहार में तीन शिव धाम प्रसिद्ध हैं। जिनमें अरेराज का स्थान सबसे उपर है। इसके बाद मुजफ्फरपुर के गरीब नाथ व बक्सर, ब्रह्पुर के शंकर मंदिर आते हैं। माना जाता है कि सोमेश्वरनाथ एक कामनापरक पंचमुखी शिवलिंग हैं। जिसपर सावन महीने में कमल का फूल व गंगा जल चढ़ाने से सारी मनोकामना पूरी होती हैं।इस मंदिर का जिक्र स्कंद, पदम व बाराह पुराण में भी है। त्रेता युग में अपनी पत्नी सीता के साथ विवाह कर जनकपुर से अयोध्या लौटने के क्रम भगवान राम ने यहां पूजा की थी। इसी कारण, हर वर्ष जनकपुर में अगहन पंचमी को आयोजित होने वाले राम विवाह में अयोध्यवाशी भाग लेते हैं। और लौटते वक्त अरेराज मंदिर में जल जरूर चढ़ाते हैं। वर्ष 1983 में प्रसिद्ध साहित्यकार सच्चितानंद वात्स्यायन (अज्ञेय) व शंकर दयाल सिंह की खोजी टीम आई थी। उन्होंने भी इस तथ्य की पुष्टि की। रोटक व्रत कथा के मुताबिक, द्वापर में अज्ञातवास के दौरान राजा युधिष्ठिर ने अपने भाइयों व पत्नी द्रौपदी के साथ यहां पूजा की थी।(रिपोर्ट/अनूप नारायण सिंह)
वास्तु शास्त्र मानव जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण
Rupesh Kumar 2020-02-26 20:12:03
पटना, 26 फरवरी 2020, (आरएनआई )।
जब भक्त की पुकार पर पहुंची थी भवानी
Rupesh Kumar 2020-02-22 21:06:03
गोपालगंज, 22 फरवरी 2020, (आरएनआई )। जिला मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर सिवान जाने वाले मार्ग पर थावे नाम का एक स्थान है, जहां मां थावेवाली का एक प्राचीन मंदिर है. मां थावेवाली को सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी के नाम से भी भक्तजन पुकारते हैं. ऐसे तो साल भर यहा मां के भक्त आते हैं, परंतु शारदीय नवरात्र और चैत्र नवारात्र के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है.
इस शिव मंदिर को तोड़ने आया था मो. गजनी, चमत्कार देख लौटा वापस
Rupesh Kumar 2020-02-21 14:39:06
बक्सर, 21 फरवरी 2020, (आरएनआई )। बिहार के बक्सर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर ब्रह्मपुर है। यही पर बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ का मंदिर है। मुस्लिम शासक मोहम्मद गजनी ब्रह्मपुर आया था। यहां के लोगों ने गजनी से अनुरोध किया कि इस शिव मंदिर को नहीं तोड़े नहीं तो बाबा उसका विनाश कर देंगे। इसी बात को लेकर गजनी ने बाबा ब्रह्मेश्वर को चैलेंज किया था, लेकिन भगवान का चमत्कार देख वह वापस लौट गया था।
जहां द्रोपदी ने की थी भगवान शिव की आराधना
Rupesh Kumar 2020-02-21 14:35:23
अरेराज, 21 फरवरी 2020, (आरएनआई )। बिहार के मोतिहारी शहर से 28 किमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित अरेराज में भगवान शिव का प्रसिद्व मंदिर है जो सोमेश्वर शिव मंदिर कहलाता है। बिहार में तीन शिव धाम प्रसिद्ध हैं। जिनमें अरेराज का स्थान सबसे उपर है। इसके बाद मुजफ्फरपुर के गरीब नाथ व बक्सर, ब्रह्पुर के शंकर मंदिर आते हैं। माना जाता है कि सोमेश्वरनाथ एक कामनापरक पंचमुखी शिवलिंग हैं। जिसपर सावन महीने में कमल का फूल व गंगा जल चढ़ाने से सारी मनोकामना पूरी होती हैं।इस मंदिर का जिक्र स्कंद, पदम व बाराह पुराण में भी है। त्रेता युग में अपनी पत्नी सीता के साथ विवाह कर जनकपुर से अयोध्या लौटने के क्रम भगवान राम ने यहां पूजा की थी। इसी कारण, हर वर्ष जनकपुर में अगहन पंचमी को आयोजित होने वाले राम विवाह में अयोध्यवाशी भाग लेते हैं। और लौटते वक्त अरेराज मंदिर में जल जरूर चढ़ाते हैं। वर्ष 1983 में प्रसिद्ध साहित्यकार सच्चितानंद वात्स्यायन (अज्ञेय) व शंकर दयाल सिंह की खोजी टीम आई थी। उन्होंने भी इस तथ्य की पुष्टि की। रोटक व्रत कथा के मुताबिक, द्वापर में अज्ञातवास के दौरान राजा युधिष्ठिर ने अपने भाइयों व पत्नी द्रौपदी के साथ यहां पूजा की थी।
महाशिवरात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग, विष दोष व सर्प दोष से मिलेगी मुक्ति
Root News of India 2020-02-20 14:26:19
इस बार महाशिवरात्रि बेहद खास होगी। महाशिवरात्रि बेहद फलदायी होने के साथ ही ज्‍योतिषिय रूप से भी बहुत महत्‍वपूर्ण है। इस मौके पर 117 वर्ष बाद ग्रहों का दुर्लभ योग बन रहा है। ज्‍योतिषियों के अनुसार इससे व्‍यक्ति के जन्‍म कुंडली में बने विष दोष और सर्प दोषों से कुछ उपाय करने से मुक्ति मिलेगी। इस बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानि शुक्रवार 21 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। ज्योतिष में जब सूर्य कुंभ राशि और चंद्र मकर राशि में होता है तब फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात ये पर्व मनाया जाता है। ज्‍योतिषियों का कहना है कि महाशिवरात्रि रात्रि का पर्व है और 21 फरवरी की रात चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए इस साल ये पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बार 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग शिवरात्रि पर बन रहा है शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। यह एक दुर्लभ योग है। 25 फरवरी 1903 को ठीक ऐसा ही योग बना था। इस साल गुरु ग्रह भी अपनी राशि धनु में हैं इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरु, शुक्र ग्रहों के दोषों से भी मुक्ति मिल सकती है। 21 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा पूजन के लिए और नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए यह योग बहुत ही शुभ माना गया है। विष योग से दूर होंगे सारे कष्ट शिवरात्रि पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगा। शनि-चंद्र की युति की वजह से विष योग बन रहा है। *शिवरात्रि पर विष योग करीब 28 साल पहले 2 मार्च 1992 को बना था, इस योग में शनि और चंद्र के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए। बुध-आदित्य और सर्प योग भी रहेंगे शिवरात्रि पर ज्योतिष आचार्य जी के अनुसार बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे। इस वजह से बुध-आदित्य योग भी बनेगा। इसके अलावा इस दिन सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य रहेंगे, इस वजह से सर्प योग भी बन रहा है। शिवरात्रि पर राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में रहेगा। शेष सभी ग्रह राहु-केतु के बीच रहेंगे.......!!
गया : देश का अनूठा धार्मिक स्थल है विष्णुपद मंदिर
Rupesh Kumar 2020-02-19 17:15:00
गया, 19 फरवरी 2020, (आरएनआई )। विश्व में मुक्तिधाम के रूप में विख्यात पितरों के श्राद्ध अौर तर्पण के लिए बिहार के गया धाम से श्रेष्ठ कोई दूसरा स्थान नहीं है। मान्यता के अनुसार गया में भगवान विष्णु पितृ देवता के रुप में निवास करते हैं। कहा जाता है कि गया में श्राद्ध कर्म करने के पश्चात भगवान विष्णु के दर्शन करने से व्यक्ति को पितृ, माता अौर गुरु के ऋण से मुक्ति मिल जाती है। यहां अति प्राचीन विष्णुपद मंदिर स्थित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के पदचिन्ह आज भी मौजूद हैं। ये मंदिर फल्गु नदी के किनारे स्थित है। इसे धर्मशीला के नाम से जाना जाता है। इनके दर्शन से व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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